भैंगापन (Squint) क्या है? जाने कारण, लक्षण और इलाज

जब हम किसी व्यक्ति से बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारी नजर उसकी आंखों पर जाती है। आंखें न सिर्फ देखने का माध्यम हैं, बल्कि भावनाओं का आईना भी होती हैं। लेकिन जब दोनों आंखें एक साथ एक दिशा में न देखकर अलग-अलग दिशा में देखने लगती हैं, तो इस स्थिति को भैंगापन या Squint (चिकित्सकीय भाषा में Strabismus) कहा जाता है।

भैंगापन या Squint

भैंगापन केवल एक कॉस्मेटिक समस्या नहीं है। यह बच्चों और बड़ों दोनों में दृष्टि विकास और आत्मविश्वास पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। अच्छी बात यह है कि आज के समय में इसका प्रभावी और सुरक्षित उपचार संभव है, बस सही समय पर पहचान और सही मार्गदर्शन जरूरी है।


भैंगापन क्या होता है?

सामान्य स्थिति में हमारी दोनों आंखें एक ही बिंदु पर फोकस करती हैं। इससे मस्तिष्क को दोनों आंखों से एक जैसी तस्वीर मिलती है और हम साफ तथा त्रि-आयामी (3D) दृष्टि प्राप्त करते हैं।

लेकिन भैंगापन में एक आंख सीधी रहती है दूसरी आंख अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे की ओर मुड़ जाती है। कभी-कभी यह लगातार होता है, और कभी-कभी केवल थकान या ध्यान की कमी में दिखाई देता है।

यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो बच्चों में आलसी आंख (Amblyopia) विकसित हो सकती है, जिसमें मस्तिष्क एक आंख की तस्वीर को नजरअंदाज करना शुरू कर देता है।


भैंगापन के प्रकार

भैंगापन के प्रकार

1. अंदर की ओर मुड़ना (Esotropia)

इसमें आंख अंदर की ओर (नाक की तरफ) मुड़ जाती है। यह छोटे बच्चों में अधिक देखा जाता है।

2. बाहर की ओर मुड़ना (Exotropia)

इस स्थिति में आंख बाहर की ओर मुड़ती है। कई बार यह केवल थकान या ध्यान हटने पर दिखता है।

3. ऊपर या नीचे की ओर मुड़ना (Hypertropia / Hypotropia)

इसमें आंख ऊपर या नीचे की दिशा में चली जाती है। यह अपेक्षाकृत कम पाया जाता है।


भैंगापन के मुख्य कारण

भैंगापन के मुख्य कारण
  • जन्मजात मांसपेशी असंतुलन
  • आंखों की मांसपेशियों का कमजोर होना
  • ज्यादा नंबर का चश्मा
  • समय से पहले जन्म (Prematurity)
  • मस्तिष्क से संबंधित समस्याएं
  • चोट या संक्रमण

कुछ मामलों में परिवार में पहले से भैंगापन होने पर बच्चों में इसका खतरा बढ़ जाता है।


बच्चों में भैंगापन क्यों गंभीर है?

बच्चों की आंखों और मस्तिष्क का विकास जन्म के बाद पहले 6–8 वर्षों में तेजी से होता है। यदि इस दौरान एक आंख सही दिशा में न देखे, तो मस्तिष्क उस आंख की छवि को दबा देता है।

परिणामस्वरूप:

  • दृष्टि कमजोर हो सकती है
  • 3D विजन प्रभावित हो सकता है
  • पढ़ाई और खेल में परेशानी
  • आत्मविश्वास में कमी

भैंगापन के लक्षण

  • एक आंख का अंदर या बाहर मुड़ना
  • दोहरी दृष्टि (Double Vision)
  • सिर को एक तरफ झुकाकर देखना
  • आंखों में तनाव या थकान
  • बार-बार पलकें झपकाना
  • तेज रोशनी में आंख बंद करना

क्या भैंगापन अपने आप ठीक हो सकता है?

नवजात शिशुओं में जन्म के बाद पहले 3–4 महीनों में आंखों का हल्का असंतुलन सामान्य हो सकता है। लेकिन यदि 4–6 महीने के बाद भी आंखें सीधी न दिखें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अधिकांश मामलों में बिना उपचार के भैंगापन अपने आप ठीक नहीं होता।


भैंगापन का निदान कैसे किया जाता है?

  • विजन टेस्ट
  • कवर टेस्ट
  • रिफ्रैक्शन टेस्ट (नंबर जांच)
  • आंखों की मांसपेशियों की जांच

बच्चों में यह परीक्षण पूरी तरह सुरक्षित और दर्द रहित होते हैं।


भैंगापन का उपचार

भैंगापन का इलाज उसकी वजह और गंभीरता पर निर्भर करता है।

भैंगापन का उपचार

1. चश्मा

यदि भैंगापन ज्यादा नंबर के कारण है, तो सही नंबर का चश्मा पहनने से आंखें सीधी हो सकती हैं।

2. आई पैच थेरेपी

यदि एक आंख कमजोर हो गई है, तो मजबूत आंख पर पैच लगाकर कमजोर आंख को सक्रिय किया जाता है।

3. विजन थेरेपी

कुछ मामलों में विशेष एक्सरसाइज जिसे विज़न थेरेपी के माध्यम से आंखों की मांसपेशियों को संतुलित किया जाता है।

4. भैंगापन सर्जरी

जब अन्य उपाय पर्याप्त न हों, तब सर्जरी की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया में आंखों की मांसपेशियों की स्थिति को संतुलित किया जाता है। यह सर्जरी आमतौर पर सुरक्षित होती है।


क्या सर्जरी के बाद दृष्टि तुरंत ठीक हो जाती है?

सर्जरी आंखों की दिशा को सीधा करती है। यदि दृष्टि पहले से कमजोर है, तो उसके लिए अलग उपचार (जैसे पैचिंग) जारी रखना पड़ सकता है। समय पर सर्जरी करवाने से परिणाम बेहतर होते हैं।


बड़ों में भैंगापन

बहुत से लोग सोचते हैं कि भैंगापन केवल बच्चों में होता है, लेकिन यह बड़ों में भी विकसित हो सकता है।

कारण हो सकते हैं:

  • डायबिटीज
  • स्ट्रोक
  • आंख या सिर की चोट
  • नसों की कमजोरी

बड़ों में यह समस्या अक्सर दोहरी दृष्टि का कारण बनती है। सही जांच और उपचार से इसे ठीक किया जा सकता है।


भैंगापन और आत्मविश्वास

भैंगापन का प्रभाव केवल दृष्टि तक सीमित नहीं है। कई बच्चे और बड़े सामाजिक रूप से असहज महसूस करते हैं। स्कूल में मजाक बनना, फोटो खिंचवाने में झिझक — ये सब मानसिक प्रभाव डाल सकते हैं।

उपचार के बाद न केवल आंखें सीधी होती हैं, बल्कि आत्मविश्वास भी लौट आता है।


कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

  • यदि 4–6 महीने के बाद भी बच्चे की आंखें सीधी न दिखें
  • अचानक दोहरी दृष्टि शुरू हो जाए
  • आंखों में दर्द या सिरदर्द के साथ आंख मुड़ने लगे
  • चोट के बाद आंखों का संतुलन बिगड़ जाए

क्या भैंगापन रोका जा सकता है?

हर मामले में रोकथाम संभव नहीं है, लेकिन:

  • नियमित आंखों की जांच
  • समय पर चश्मा पहनना
  • समय से पहले जन्मे बच्चों की विशेष जांच
  • आंखों की चोट से बचाव

भैंगापन के लिए Save Sight Centre क्यों चुनें?

भैंगापन (Squint) केवल आंखों की दिशा में असंतुलन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास, दृष्टि विकास और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर सकता है। Save Sight Centre में हम भैंगापन के हर मरीज को विशेष ध्यान और संवेदनशीलता के साथ देखते हैं। 1,60,000+ से अधिक संतुष्ट मरीजों के विश्वास के साथ हमारा केंद्र विश्वसनीय नेत्र देखभाल का प्रतीक बन चुका है।

Save Sight Centre में हमारी अनुभवी टीम, जिसमें प्रसिद्ध स्क्विंट विशेषज्ञ (squint specialist) डॉ. हिमशिखा अग्रवाल शामिल हैं, प्रत्येक मरीज की आंखों की विस्तृत और सटीक जांच कर समस्या के मूल कारण के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करती है। हम केवल लक्षणों का इलाज नहीं करते, बल्कि समस्या के मूल कारण को समझकर व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करते हैं।

हमारा उद्देश्य केवल आंखों को सीधा करना नहीं, बल्कि बेहतर दृष्टि और आत्मविश्वास लौटाना है। उपचार से पहले मरीज और उनके परिवार को पूरी जानकारी सरल भाषा में दी जाती है, ताकि वे हर चरण को समझ सकें और आश्वस्त रहें। पारदर्शिता और विश्वास हमारे उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

Save Sight Centre में हम मानते हैं कि समय पर सही उपचार जीवन बदल सकता है। यदि आपके बच्चे या परिवार के किसी सदस्य में भैंगापन के लक्षण दिखाई दें, तो देरी न करें। सही दिशा में उठाया गया एक कदम, स्पष्ट दृष्टि और नए आत्मविश्वास की शुरुआत हो सकता है।


निष्कर्ष

भैंगापन एक सामान्य लेकिन गंभीर नेत्र समस्या हो सकती है। इसे केवल सौंदर्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।

समय पर पहचान, सही जांच और उचित उपचार से आंखों की दिशा और दृष्टि दोनों को सुधारा जा सकता है।

यदि आपके बच्चे या परिवार में किसी की आंखें सीधी नहीं दिख रही हैं, तो घबराएं नहीं — बल्कि तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें।

आंखें हमारी दुनिया से जुड़ने का माध्यम हैं। उन्हें सही दिशा देना हमारी जिम्मेदारी है।