आंख आना / आई फ्लू कितना सामान्य है?

आंखें शरीर का सबसे संवेदनशील अंग हैं, इसलिए उनमें होने वाली थोड़ी सी भी समस्या तुरंत परेशान करती एवं दिखाई देने लगती है। आँख आना, जिसे पिंक आई और डॉक्टरी भाषा में कंजेक्टिवाइटिस कहते हैं, आँखों की सबसे आम समस्या है। यह समस्या बच्चों और वयस्कों सबको प्रभावित कर सकती है। यह आमतौर पर एक आँख से शुरू होती है और कुछ दिन में दूसरी आँख में फ़ैल जाती है, और इसके कई मामलों में दो हफ़्तों में यह अपनेआप ठीक हो जाती है। यह परिवार के सभी सदस्यों में फ़ैल सकता है ।

कंजक्टिवाइटिस

कंजक्टिवाइटिस क्या होता है?

हमारी आंखों के सफेद हिस्से और पलकों के अंदर की सतह पर एक पारदर्शी, पतली झिल्ली होती है जिसे कंजक्टिवा कहा जाता है। जब इस झिल्ली में सूजन आ जाती है या यह किसी संक्रमण की चपेट में आ जाती है तो इस स्थिति को कंजक्टिवाइटिस या आम भाषा में आंख आना कहा जाता है।

सूजन की वजह से कंजक्टिवा में मौजूद छोटी-छोटी रक्त नलिकाएं ज्यादा स्पष्ट दिखने लगती हैं, जिसके कारण आंखों का सफेद हिस्सा लाल या गुलाबी दिखाई देने लगता है; इसी वजह से इसे पिंक आई भी कहा जाता है। यह समस्या तीव्र (एक्यूट) रूप में अचानक और कम समय के लिए हो सकती है या लंबे समय तक बनी रहने पर क्रॉनिक कंजक्टिवाइटिस का रूप भी ले सकती है।


कंजक्टिवाइटिस के प्रमुख कारण

कंजक्टिवाइटिस कई अलग–अलग कारणों से हो सकता है, और हर कारण के साथ लक्षणों की प्रकृति तथा संक्रामकता भी बदल जाती है।

1. वायरल कंजक्टिवाइटिस

वायरल कंजक्टिवाइटिस के अधिकतर मामले एडेनोवायरस के कारण होते हैं, लेकिन हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस, वैरिसेला जोस्टर वायरस और कोरोना वायरस जैसे अन्य वायरस भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। आमतौर पर यह पहले एक आंख में शुरू होता है और कुछ दिनों में दूसरी आंख भी संक्रमित हो जाती है।

2. बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस

कुछ खास बैक्टीरिया आंखों की सतह पर संक्रमण पैदा कर देते हैं, जिससे बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस होता है। यह भी वायरल की तरह संक्रामक है और संक्रमित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाले पानी या गाढ़े डिस्चार्ज के सीधे या परोक्ष संपर्क से दूसरे लोगों तक पहुंच जाता है, जैसे एक ही तौलिया, रुमाल या तकिया साझा करने पर। यह एक या दोनों आंखों को प्रभावित कर सकता है और अक्सर चिपचिपा, पीला या हरा डिस्चार्ज इसकी पहचान बन जाता है।

3. एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस

जिन लोगों की आंखें किसी एलर्जन (जैसे परागकण, धूल, पालतू जानवरों के रोएं या प्रदूषण) के प्रति संवेदनशील होती हैं, उन्हें एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस हो सकता है। इसमें शरीर की एलर्जिक प्रतिक्रिया के कारण कंजक्टिवा में सूजन, खुजली और पानी आना प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। यह आमतौर पर संक्रामक नहीं होता, लेकिन मौसम बदलने, खासकर वसंत या ठंडी हवा में, इसके केस अचानक बढ़ जाते हैं।

कंजंक्टिवाइटिस के प्रकार

4. रसायनों या बाहरी पदार्थों का प्रभाव

कभी-कभी कंजक्टिवाइटिस किसी रसायन या बाहरी चीज के संपर्क में आने से भी हो जाता है, जैसे स्विमिंग पूल के पानी में मौजूद क्लोरीन, धुआं, स्प्रे, या आंख में धूल-कण चले जाना। ऐसे मामलों में आंखों में अचानक जलन, लालपन और पानी आना शुरू हो जाता है, लेकिन अधिकतर बार यदि रसायन बहुत तीव्र न हो तो लक्षण एक-दो दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं।

5. नवजात शिशुओं में कंजक्टिवाइटिस

नवजात शिशुओं में अक्सर अश्रु नलिका (टियर डक्ट) के पूरी तरह खुला न होने या जन्म के समय होने वाले संक्रमण के कारण कंजक्टिवाइटिस देखा जाता है। शिशुओं में यह स्थिति विशेष ध्यान मांगती है और माता-पिता को स्वयं दवा देने के बजाय तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या नेत्र विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।


किन परिस्थितियों में कंजक्टिवाइटिस का खतरा ज्यादा होता है?

कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जहां आंख आना होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

  • गर्म और नम मौसम में, जब हवा में वायरस और बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं।
  • किसी ऐसे व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में रहना जिसे वायरल या बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस हो।
  • यदि आपका शरीर एलर्जी–प्रोन है और आप अक्सर परागकण, धूल या पालतू जानवरों के संपर्क में रहते हैं।
  • स्विमिंग पूल के पानी, खासकर क्लोरीन, या अन्य रसायनों के संपर्क में बार-बार आना।
  • कांटेक्ट लेंस का लंबे समय तक लगातार प्रयोग, खराब सफाई या एक्सपायर्ड सॉल्यूशन का इस्तेमाल।

कंजक्टिवाइटिस के लक्षण कैसे पहचानें?

कंजक्टिवाइटिस भले ही आंखों की सतह तक सीमित रहता है, लेकिन इसके लक्षण काफी परेशान करने वाले हो सकते हैं।

कंजक्टिवाइटिस के लक्षण
  • एक या दोनों आंखों का लाल या गुलाबी दिखाई देना।
  • आंखों में जलन, चुभन या खुजली जैसा एहसास होना, जो बार-बार आंख मलने पर बढ़ सकता है।
  • सामान्य से अधिक आंसू निकलना, आंखों का पानी–पानी रहना।
  • आंखों से पानी जैसा साफ डिस्चार्ज या गाढ़ा, चिपचिपा स्राव निकलना, खासकर बैक्टीरियल मामलों में।
  • आंखों में किरकिरी या रेत के कण जैसी अनुभूति होना।
  • पलकें सूज जाना और विशेषकर एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस में आंखों के आसपास सूजन दिखना।

अधिकांश मामलों में कंजक्टिवाइटिस से दृष्टि पर स्थायी असर नहीं पड़ता, लेकिन यदि लक्षणों के साथ नजर धुंधली हो रही हो या प्रकाश से तेज तकलीफ हो रही हो तो यह गंभीर संकेत हो सकता है।


संक्रमण कितनी तेजी से फैलता है?

वायरल और बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस दोनों ही अत्यधिक संक्रामक होते हैं, यानी एक व्यक्ति से दूसरे तक बहुत जल्दी पहुंच सकते हैं। संक्रमित आंखों से निकलने वाला डिस्चार्ज, पानी, या उससे लगे हुए तौलिए, तकिए, रूमाल, रूम साफ करने वाले टिश्यू आदि के संपर्क में आने से यह संक्रमण फैल जाता है।

संक्रमण को फैलने से कैसे रोकें?

कंजक्टिवाइटिस के फैलाव को रोकने के लिए स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

संक्रमण को फैलने से रोकें
  • आंखों को अनावश्यक रूप से हाथ से न छुएं, 6खासकर यदि आपके हाथ धुले न हों।
  • साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें, खासकर आंख, नाक या चेहरे को छूने के बाद।
  • अपना तौलिया, रुमाल, तकिया, आई मेकअप, लेनज़ केस आदि किसी के साथ साझा न करें।
  • तकिए के कवर, तौलिए और रूमाल को रोज बदलें और गर्म पानी में धोकर धूप में सुखाएं, ताकि संक्रमण के कीटाणु नष्ट हो सकें।
  • यदि बच्चे की आंख आई है तो उसे स्कूल भेजने से पहले डॉक्टर से सलाह लें और कम से कम शुरुआती अत्यधिक संक्रामक दिनों में घर पर ही आराम करने दें।

डॉक्टर से कब तुरंत मिलना चाहिए?

कुछ संकेतों को कभी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये साधारण कंजक्टिवाइटिस से अधिक गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

  • आंखों में तेज दर्द या लगातार चुभन होना।
  • नजर का धुंधला होना, चीजें साफ न दिखना या अचानक विजन में बदलाव।
  • प्रकाश (धूप, बल्ब, स्क्रीन) के प्रति असामान्य संवेदनशीलता, जिससे आंखें खुली रखना मुश्किल हो।
  • आंखों का अत्यधिक लाल हो जाना या सूजन का तेजी से बढ़ना।
  • कंजक्टिवाइटिस के साथ-साथ तेज सिरदर्द, बुखार या चेहरे में दर्द जैसे लक्षण।

ऐसे लक्षण दिखते ही स्वयं दवा लेने या किसी की आंख की दवा अपने ऊपर आजमाने के बजाय तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।


घर पर आराम के लिए क्या करें और क्या न करें?

कंजक्टिवाइटिस के दौरान कुछ सरल उपाय लक्षणों में राहत दे सकते हैं, लेकिन इन्हें हमेशा डॉक्टर की सलाह के साथ जोड़कर ही अपनाना बेहतर होता है।

  • साफ, ठंडे पानी से तैयार कोल्ड कंप्रेस आंखों पर लगाने से खुजली और जलन में राहत मिल सकती है।
  • आंखों पर ठंडे पानी की पट्टी भी सूजन और लालपन कम करने में मदद कर सकती है, खासकर एलर्जिक मामलों में।
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहनना तुरंत बंद कर दें और इलाज पूरा होने के बाद ही डॉक्टर की सलाह से दोबारा शुरू करें।
  • आई मेकअप, काजल या लाइनर का उपयोग कुछ दिनों के लिए बंद रखें, ताकि आंखों पर अतिरिक्त रसायनिक दबाव न पड़े।
  • आंखों को रगड़ने या खरोंचने से बचें, क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ सकता है और कॉर्निया को चोट पहुंचने का जोखिम रहता है।

छोटी लगने वाली समस्या को हल्के में न लें

कंजक्टिवाइटिस यानी आंख आना दिखने में भले ही एक सामान्य और अक्सर खुद ठीक हो जाने वाली समस्या लगे, लेकिन इसे हल्के में लेना सही नहीं है। समय पर पहचान, सही कारण का पता लगाना, व्यक्तिगत स्वच्छता और डॉक्टर की सलाह से किया गया उपचार न सिर्फ आपके लिए राहत देता है, बल्कि आपके परिवार और आसपास के लोगों को भी संक्रमण से बचाता है। यदि लक्षण कुछ दिनों में कम न हों या दर्द, धुंधलापन और प्रकाश से तकलीफ जैसे गंभीर संकेत दिखाई दें, तो बिना देरी किए नेत्र विशेषज्ञ से मिलना सबसे सुरक्षित विकल्प है।


कंजक्टिवाइटिस का उपचार

कंजक्टिवाइटिस का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है, इसलिए डॉक्टर पहले यह पहचानते हैं कि समस्या वायरल, बैक्टीरियल, एलर्जिक या रसायनिक है।

कंजक्टिवाइटिस का उपचार
  • वायरल कंजक्टिवाइटिस में आम तौर पर विशेष एंटीवायरल आई ड्रॉप नहीं दी जाती, बल्कि 7–8 दिनों तक कोल्ड कंप्रेस, आर्टिफिशियल टीयर्स और आंखों की सफाई जैसे सहायक उपायों से ही आराम मिलता है।
  • बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस में नेत्र विशेषज्ञ एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट लिखते हैं, जिनके नियमित उपयोग से कुछ ही दिनों में लालपन, डिस्चार्ज और सूजन कम हो जाते हैं।
  • एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस में एलर्जन से बचाव के साथ एंटीहिस्टामिन या एंटीइन्फ्लैमेटरी आई ड्रॉप्स दी जाती हैं, जो खुजली और सूजन को नियंत्रित करती हैं।

सायनों या धुएं के कारण आंख आने पर आंखों को तुरंत साफ पानी से धोना, जलन पैदा करने वाले पदार्थ से दूरी बनाना और आवश्यकता होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है, जबकि किसी भी स्थिति में स्वयं स्टेरॉइड या दूसरों की आई ड्रॉप्स का प्रयोग करना खतरनाक साबित हो सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • 01.क्या कंजक्टिवाइटिस हमेशा संक्रामक होता है?

    नहीं, सिर्फ वायरल और बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस संक्रामक होते हैं; एलर्जिक और ज्यादातर रसायनिक कंजक्टिवाइटिस नहीं फैलते।

  • 02.क्या आंख आने पर घर पर ही इलाज कर सकते हैं?

    हल्के मामलों में साफ पानी, कोल्ड कंप्रेस और आराम से राहत मिल सकती है, लेकिन गाढ़ा डिस्चार्ज, दर्द, धुंधलापन या 2–3 दिन में सुधार न होने पर डॉक्टर से मिलना जरूरी है।

  • 03.क्या कंजक्टिवाइटिस के दौरान मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देख सकते हैं?

    सीधे संक्रमण नहीं बढ़ता, लेकिन ज्यादा स्क्रीन टाइम से सूखापन और जलन बढ़ती है, इसलिए समय सीमित रखें और तेज ब्राइटनेस से बचें; दर्द या धुंधलापन हो तो स्क्रीन से ब्रेक लें।

  • 04.आंख आने पर क्या कांटेक्ट लेंस और मेकअप इस्तेमाल कर सकते हैं?

    कांटेक्ट लेंस तुरंत निकालकर इलाज पूरा होने तक न पहनें, और पुराने लेंस/केस बदलें; आई मेकअप कुछ समय के लिए बंद रखें और पुराना मस्कारा आदि डिस्कार्ड करना बेहतर है।

  • 05.कंजक्टिवाइटिस आमतौर पर कितने दिनों में ठीक हो जाता है?

    वायरल अक्सर 7–10 दिन में, बैक्टीरियल सही दवा से लगभग एक हफ्ते में ठीक हो जाता है; एलर्जिक तब तक रहता है जब तक एलर्जन के संपर्क में हैं, इसलिए ट्रिगर से बचना जरूरी है।